Monday, January 24, 2011

अन्नामलाई यूनिवर्सिटी के तीन कोर्स से सावधान रहें

अन्नामलाई यूनिवर्सिटी के तीन कोर्स से सावधान रहें
नेशनल काउन्सिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) ने छात्रों को आगाह किया है कि तमिलनाडु कि अन्नामलाई यूनिवर्सिटी दूर चलाए जा रहे तीन कोर्स काउन्सिल से मान्यता प्राप्त नहीं है। ये कोर्स है डिप्लोमा इन फिजिकल एजुकेशन (डीपीएड), बैचलर इन फिजिकल एजुकेशन (बीपीएड) तथा मास्टर इन फिजिकल एजुकेशन (एमपीएड) हैं। छात्रों को इन कोर्सों को लेकर गुमराह नहीं होने कि सलाह डी गयी है।

रमाकांत चौधरी-आर्थिक-पत्रकार -व्यापार-मुंबई

Thursday, January 20, 2011

सहारा इंडिया में निवेश करने पर सतर्क रहें

सहारा इंडिया में निवेश करने पर सतर्क रहें

भारतीय रिजर्व बैंक ने भारत के आम निवेशकों को आगाह किया है कि सहारा इंडिया में निवेश करने से पहले सतर्कता बरतें वर्ना आपके निवेश को नुकसान हो सकता है। जिसकी जिम्मेदारी रिजर्व बैंक कि नहीं होगी।

भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार सहारा इंडिया कि उक्त कंपनी जैसे सहारा इंडिया फाईनेंसियल कारपोरेशन लिमिटेड,सहारा इंडिया कारपोरेशन इन्वेस्टमेंट लिमिटेड और सहारा इंडिया इन्फ्रास्ताक्चार लिमिटेड ही रिजर्व बैंक से नियंत्रित है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने १७ जून 2008 को एक आदेश जारी किया था जिनमें ३० जून 2011 के बाद निवेश पूर्ण होने वाली स्कीम पर सहारा इंडिया फाईनेंस कारपोरेशन लिमिटेड को कोई नया डिपोजिट नहीं lene के liye निर्देशित किया गया था।
Ramakant Chaudhary-reporter-vyapar-mumbai-india
email: rkchaudhary2020@gmail.com

Thursday, December 23, 2010

पिता....का मूल्य
पिता जीवन है, संबल है, शक्ति है.
पिता स्रष्टि के निर्माता कि अभिव्यक्ति है.
पिता अंगुली पकडे बच्चे का सराहा है.
पिता कभी कुछ मीठा है तो कभी कुछ खारा है.
पिता परिवार का अनुशासन है, रोटी,कपडा और मकान है.
चहेते से परिंदे का बड़ा आसमान है.
पिता अप्रदर्शित,अनंत प्यार है.
पिता है तो बच्चों को इंतजार है.
पिता से ही बच्चों के ढेर सारे सपने हैं.
पिता है तो बाज़ार के सब खिलौने अपने हैं.
पिता से परिवार में राग प्रतिपल राग है.
पिता से ही मां कि बूंदी और सुहाग है.
पिता परमात्मा कि जगत के प्रति आसक्ति है.
पिता गृहस्थाश्रम में उच्च स्थिति कि भक्ति है.
पिता अपनी इच्छाओं का हनन और परिवार कि पूर्ति है.
पिता रक्त में दिए हुए संस्कारों कि मूर्ति है.
पिता एक जीवन को जीवन दान है.
पिता दुनिया दिखाने का अहसास है.
पिता सुरक्षा है, अगर सिर पर हात है.
पिता नहीं तो बचपन अनाथ है.
तो पिता से बड़ा तुम अपना नाम करो.
पिता का अपमान नहीं,अभिमान करो.
क्योंकि माँ बाप कि कमी कोई पात नहीं सकता.
ईश्वर भी इनके आशीषों को काट नहीं सकता.
दुनिया में किसी भी देवता का स्थान दूजा है.
माँ बाप की सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है.
विश्व में किसी भी तीर्थ की यात्रा सब व्यर्थ है.
यदि बेटे के होते हुए माँ बाप असमर्थ है.
वो खुशनसीब होते हैं,माँ बाप जिनके साथ होते है.
क्योंकि माँ बाप के आशीषों के हजारों हाथ होते हैं.

रमाकांत चौधरी-आर्थिक पत्रकार-व्यापार-मुंबई.

Sunday, December 19, 2010

परम्परा....बेटियां

परम्परा....बेटियां
परम्परा....बेटियां

परम्परा....

ओस की एक बूंद सी होती है बेटियां

स्पर्श खुरदरा हो तो रोटी है बेटियां

रोशन करेगा बेटा तो एक ही कुल को

दो दो कुलों की शान बढाती है बेटियां

कोई नहीं दोस्तों एक दुसरें से कम

हीरा अगर है बेटा तो मोती है बेटियां

काँटों की राह पे ये खुद चलती रहेंगी

औरों के लिए फूल ही बोटी है बेटियां

विधि का विधान है यही दुनिया की रस्म है

अपने पिर्यों को छोड़ पिया के घर जाती है बेटियां

धन्यवाद
रमा कान्त चौधरी आर्थिक पत्रकार मुंबई

Wednesday, May 26, 2010

मैथिलि में बातचीत करेकें प्लेटफ़ॉर्म

आय काएल खासकें दिल्ली में मैथिलि समाजक लोकसब दिन राती कें कामकाज सं थाकल रहेत छति आओर ओकर बाद समय मिलेत अछी तं ओ मैथिलि में बात चीत सुनय के लेल प्रयासरत रहैत छथिन आओर ओकर कमी कें पूरा करैक लेल हम मैथिलि वासी लोक सभ कें लेल किछु लिखे लेल चाहि रहल छी। जाहि में सब तरह कें बातचीत कें समावेश होयत । हमहू मैथिल छी आओर हमरा कहैक तात्पर्य ई अछी कि मैथिल समाजक सामंजसक लेल संगठन तं देश विदेश में बहुत अछी मुदा ओही सं जुड़े में लोक सब विशेष नाही चाहेत छथि कियाक तं ओही में मैथिलि समाजक अधिकाधिक समावेश नाही छे। आब ज़माना बदैल रहल अछी ताहि कं ध्यान में राखी कं आब समय आबि गेल अछी जे हम सभ सर्ब धर्म समभाव सं बातचीत करी आओर सभ कें मिलबैक लेल प्रयास करी जाहि सं समाजक तेजी सं विकास होयत। ताहि में जाति पात कें कोनों तरहक दुर्गन्ध नाही होबाक चाहि तखन सभ जाति कें लोक सभ अपने आप मिली जुली कें मैथिलि समाज कें सात जुड़े में अग्रसर होयत आओर ताहि सं मिथिला कें विकास भ सकैत अछी। हमरा कहैक तात्पर्य ई अछी जे मैथिलि समाज तं अपने आप सभ मैथिलि कें छी मुदा पिछरल वर्ग कें लोक सभ अपना कें हीन भावना सं मैथिलि समाज कें संघठन सं नाही जुडी पा रहल छथि ताहि कें हुनका मलाल अछी।

धन्यवाद

रमाकांत चौधरी

rkchaudharuy२०२०@जीमेल.कॉम

(m) 09313962798

Wednesday, January 13, 2010

श्री सुन्दर कांड प्रचारणी समिति

नई दिल्ली-श्री सुंदर कांड प्रचारणी समिति का गठन पहली अप्रैल 2009 को २४३/ लखपत कालोनी पार्ट-,मीठापुर विस्तार, बदरपुर,नई दिल्ली-११००४४ पर एक बैठक मैं हुआ। जिसमें श्री रमा कान्त चौधरी को अध्यक्ष (9313862798)चुना गया। अन्य पदाधिकारियों मैं श्री अनिरुद्र सिंह-उपाध्याक्ष(9311435059),श्री धर्मदेव महतो -उपाध्यक्ष(9818640610),श्री मिथिलेश उपाध्याय-महासचिव(922090399),श्री सियाराम यादव-संगठन मंत्री(9350208127),श्री राम जग-सचिव(20593897),श्री अमित उपाध्याय-कोषाध्यक्ष (9210293557) तथा श्री अयोध्या प्रशाद (9810375967)एवं श्री प्रेम मिश्रा-प्रचार मंत्री चुने गए।
कार्यकारणी सदस्यों मैं सर्वश्री बी.बी सिंह(9810085335), लीला कान्त झा,(9868720619)वीर भान सिंह(9811862376), आदि हैं।
इस समिति के बारे मैं जानने के लिए संपर्क करें।
फ़ोन नम्बर- ९३१३८६२७९८ & ९०१५८३७१९३
Email-rkchaudhary2007@yahoo.co.in