आय काएल खासकें दिल्ली में मैथिलि समाजक लोकसब दिन राती कें कामकाज सं थाकल रहेत छति आओर ओकर बाद समय मिलेत अछी तं ओ मैथिलि में बात चीत सुनय के लेल प्रयासरत रहैत छथिन आओर ओकर कमी कें पूरा करैक लेल हम मैथिलि वासी लोक सभ कें लेल किछु लिखे लेल चाहि रहल छी। जाहि में सब तरह कें बातचीत कें समावेश होयत । हमहू मैथिल छी आओर हमरा कहैक तात्पर्य ई अछी कि मैथिल समाजक सामंजसक लेल संगठन तं देश विदेश में बहुत अछी मुदा ओही सं जुड़े में लोक सब विशेष नाही चाहेत छथि कियाक तं ओही में मैथिलि समाजक अधिकाधिक समावेश नाही छे। आब ज़माना बदैल रहल अछी ताहि कं ध्यान में राखी कं आब समय आबि गेल अछी जे हम सभ सर्ब धर्म समभाव सं बातचीत करी आओर सभ कें मिलबैक लेल प्रयास करी जाहि सं समाजक तेजी सं विकास होयत। ताहि में जाति पात कें कोनों तरहक दुर्गन्ध नाही होबाक चाहि तखन सभ जाति कें लोक सभ अपने आप मिली जुली कें मैथिलि समाज कें सात जुड़े में अग्रसर होयत आओर ताहि सं मिथिला कें विकास भ सकैत अछी। हमरा कहैक तात्पर्य ई अछी जे मैथिलि समाज तं अपने आप सभ मैथिलि कें छी मुदा पिछरल वर्ग कें लोक सभ अपना कें हीन भावना सं मैथिलि समाज कें संघठन सं नाही जुडी पा रहल छथि ताहि कें हुनका मलाल अछी।
धन्यवाद
रमाकांत चौधरी
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Wednesday, May 26, 2010
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